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एनयूएसआरएल रांची में तीन दिवसीय विधिक शिक्षा कार्यक्रम का सफल आयोजन

  • 4 hours ago
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रांची: नेशनल यूनिवर्सिटी ऑफ स्ट्डी एंड रिसर्च इन लॉ, रांची में 13 से 15 मार्च 2026 तक युवा अधिवक्ताओं के लिए तीन दिवसीय सतत विधिक शिक्षा (Continuous Legal Education - CLE) कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम का उद्देश्य प्रारंभिक स्तर के अधिवक्ताओं के पेशेवर कौशल एवं व्यावहारिक ज्ञान को सुदृढ़ करना था। कार्यक्रम में विधि शिक्षाविदों एवं विधि व्यवसाय से जुड़े विशेषज्ञों ने युवाओं को ट्रेनिंग दी।




कार्यक्रम के प्रथम दिन असिस्टेंड प्रोफसर डॉ संचिता तिवारी द्वारा पेशेवर नैतिकता एवं अधिवक्ता कौशल पर सत्र आयोजित किया गया, जिसमें उन्होंने विधि व्यवसाय में ईमानदारी, अनुशासन एवं नैतिक जिम्मेदारी के महत्व पर जोर दिया। असिस्टेंड प्रोफेसर डॉ कौशिक बागची ने न्यायालयीन प्रक्रियाओं एवं वाद संचालन की रणनीतियों पर विस्तार से चर्चा की। शुभम श्रीवास्तव ने गवाहों से निपटने की विधि पर महत्वपूर्ण जानकारी दी, वहीं डॉ. मृत्युञ्जय मयंक ने प्रभावी मौखिक प्रस्तुतिकरण एवं न्यायालयीन वकालत की कला पर प्रकाश डाला।


दूसरे दिन अधिवक्ता सोनल तिवारी (झारखंड उच्च न्यायालय एवं राष्ट्रीय हरित अधिकरण में प्रैक्टिस) ने न्याय तक पहुंच, विधिक सहायता एवं जनहित याचिका जैसे विषयों पर चर्चा करते हुए संवैधानिक अधिकारों एवं विधिक जागरूकता के महत्व को रेखांकित किया। इसके अलावा, सुराना एंड सुराना इंटरनेशनल अटॉर्नीज के पार्टनर श्री पी. सुराना ने विधिक क्षेत्र में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) के उपयोग पर सत्र लिया, जिसमें इसके अवसरों एवं नैतिक चुनौतियों पर विचार साझा किए गए। दिन का समापन अधिवक्ता सुदर्शन श्रीवास्तव द्वारा न्यायालयीन शिष्टाचार एवं पेशेवर आचरण पर व्याख्यान के साथ हुआ।


कार्यक्रम के अंतिम दिन श्री डी.सी. मोंडल ने न्यायालय में फाइलिंग प्रक्रिया एवं वकालतनामा से संबंधित व्यावहारिक पहलुओं पर प्रशिक्षण दिया। इसके पश्चात डॉ. कौशिक बागची ने प्राकृतिक न्याय एवं न्यायिक प्रणाली पर सैद्धांतिक चर्चा की। समापन सत्र में झारखंड उच्च न्यायालय के वरिष्ठ अधिवक्ता इंद्रजीत सिन्हा ने केस तैयारी, ड्राफ्टिंग एवं क्लाइंट प्रबंधन से जुड़े महत्वपूर्ण सुझाव साझा किए। प्रतिभागियों ने कार्यक्रम की व्यावहारिक उपयोगिता एवं संवादात्मक शैली की सराहना की। उन्होंने कहा कि इस कार्यक्रम से उन्हें विधिक पेशे की वास्तविक चुनौतियों को समझने में मदद मिली।


इस तीन दिवसीय प्रशिक्षण में शामिल हुई शारदा मुंडा ने कहा, “यह कार्यक्रम अत्यंत ज्ञानवर्धक रहा। विशेषज्ञों द्वारा साझा किए गए व्यावहारिक अनुभवों से हमें पाठ्यपुस्तकों से परे विधिक पेशे की वास्तविक समझ मिली।” सुभम सुरिन ने कहा, “अनुभवी अधिवक्ताओं से कानून के व्यावहारिक पहलुओं को सीखना एक मूल्यवान अनुभव रहा, जो युवा वकीलों के पेशेवर विकास में सहायक होगा।”

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