क्या PIL खत्म कर देना चाहती है सरकार ? क्या है पीआईएल, क्यों है जरूरी, खत्म हुआ तो क्या होगा असर
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Pil and judicial review
क्या पीआईएल ( PIL) खत्म कर देना चाहिए। इस सवाल के जवाब के लिए आपको यह समझना होगा कि पीआईएल है क्या। Public Interest Litigation (पब्लिक इंटरेस्ट लिटिगेशन) जनहित याचिका (PIL) भारत में न्यायपालिका द्वारा समाज के कमजोर, वंचित वर्गों की आवाज के लिए, व्यापक जनहित (पर्यावरण, मानवाधिकार, भ्रष्टाचार) की रक्षा करने का एक मजबूत हथियार है।
यह नियम खासकर पीड़ित व्यक्ति को यह राहत देता है कि उसकी तरफ से कोई और न्यायलय का दरवाजा खटखटा सकता है। "लोको स्टैंडी" (प्रभावित व्यक्ति का ही कोर्ट जाना) के नियम को हटाता है। इससे न्याय तक पहुँच (Access to Justice) यह गरीब और अशिक्षित लोगों को, जो न्यायालय तक पहुंच नहीं होती ऐसे में पीआईएल मदद करता है। मौलिक अधिकारों की रक्षा के लिए जरूरी है। लोकतंत्र की मजबूती पर्यावरण और जनहित मुद्दे सहित कई अहम मुद्दों की रक्षा के लिए इसका बेहद महत्व है। देशभर में कोर्ट में कई ऐसे मुद्दे हैं जो इसकी वजह से आये और कोर्ट के आदेश के बाद सामाजिक, आर्थिक रूप से इसका असर रहा।
अब मेरे सवाल का जवाब दीजिए, क्या पीआईएल ( PIL) खत्म कर देना चाहिए? अगर आप इसकी अहमियत अच्छी तरह समझ गये हैं तो जाहिर है कि आपका भी जवाब नहीं होगा, सुप्रीम कोर्ट ने भी यही कहा, केंद्र सरकार ने कोर्ट में यही तर्क रखा है कि अब पीआईएल खत्म को खत्म कर देना चाहिए क्योकि जिस उद्देश्य के साथ इसे शुरू किया गया था अब उसका उद्देश्य पूरा हो चुका है।
केंद्र सरकार की इस मांग पर सुप्रीम कोर्ट ने साफ कर दिया है कि इससका आज भी महत्व है और इसे ऐसे ही खत्म नहीं किया जा सकता है। सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायधिश ने कहा, पीआईएल ( PIL ) ने आम लोगों को न्याय तक पहुंचने का रास्ता दिया है और इसे खत्म करना न्याय व्यवस्था के लिए नुकसानदेह हो सकता है।
क्यों केंद्र सरकार खत्म करना चाहती है पीआईएल
केंद्र सरकार का तर्क है कि हाल के वर्षों में PIL का दुरुपयोग बढ़ा है। कई मामलों में व्यक्तिगत हित या राजनीतिक उद्देश्यों से याचिकाएं दायर की जा रही हैं, जिससे न्यायालय का समय और संसाधन प्रभावित हो रहे हैं। केंद्र सरकार चाहती है कि इस व्यवस्था में सुधार या इसे सीमित करना जरूरी है, ताकि केवल गंभीर और वास्तविक जनहित के मामलों को ही प्राथमिकता मिले।
सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा
सुप्रीम कोर्ट में चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया जस्टिस सूर्यकांत ने कहा, PIL प्रणाली ने देश में न्याय की पहुंच को व्यापक बनाया है। गरीब और वंचित वर्ग को न्याय दिलाने में अहम भूमिका, पर्यावरण, मानवाधिकार और सामाजिक न्याय से जुड़े मामलों में बड़ा योगदान, कोर्ट तक सीधे पहुंच न रखने वाले लोगों के लिए सहारा उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि कुछ मामलों में दुरुपयोग जरूर हुआ है, लेकिन इसके आधार पर पूरी प्रणाली को खत्म करना सही नहीं होगा।
सुप्रीम कोर्ट में पीआईएल को लेकर केंद्र सरकार ने इसलिए भी इसे खत्म करने या सख्त नियम लागू करने का आग्रह किया है कि क्योंकि कई मामले ऐसे हैं जिन्हें पीआईएल के तहत दायर किया जाता है। कोर्ट ने कहा कि अगर 2006 में दाखिल हुई सबरिमाला से जुड़ी PIL आज के समय में दाखिल होती, तो संभव है कि उसे प्रारंभिक स्तर पर ही खारिज कर दिया जाता। पिछले कुछ वर्षों में PIL का दायरा काफी बढ़ा है और कई मामलों में इसका इस्तेमाल व्यक्तिगत या वैचारिक एजेंडा आगे बढ़ाने के लिए किया जा रहा है।
कोर्ट ने स्पष्ट संकेत दिया कि अब न्यायपालिका PIL को पहले की तुलना में ज्यादा सख्ती से परख रही है, ताकि केवल वास्तविक जनहित से जुड़े मामलों को ही स्वीकार किया जाए।




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