आज बुकिंग की तो कितने दिनों में मिलेगा गैस सिलेंडर, क्या सच में है किल्लत
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ईरान और अमेरिका युद्ध का असर पूरी दुनिया पर पड़ रहा है। एलपीजी, पेट्रोलियम पदार्थों की किल्लत बढ़ रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने संबोधन में भी यह साफ कहा है कि यह समस्या और बड़ी हो सकती है। अब सवाल यह है कि यह संकट कितना बड़ा है। एक तरफ सरकार LPG सप्लाई को “सामान्य” बता रही है, तो दूसरी तरफ दिल्ली जैसे शहरों में जमीनी हालात चुनौतीपूर्ण बने हुए हैं। ऐसे में यह साफ है कि संकट का बड़ा कारण अफवाह, पैनिक बुकिंग और वैश्विक सप्लाई बाधा का मिला-जुला असर है। यह भी पढ़ें-
क्या है सरकार का पक्ष कब मिलेगा सिलेंडर
पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने उन खबरों को खारिज किया है, जिनमें एलपीजी रिफिल बुकिंग के लिए तय समय सीमा को लेकर भ्रम फैलाया जा रहा था। कुछ समाचार रिपोर्टों और सोशल मीडिया पोस्ट एलपीजी रिफिल बुकिंग के लिए संशोधित समय सीमा का दावा किया गया है जो गलत है। रिफिल बुकिंग की मौजूदा समय-सीमा में कोई बदलाव नहीं किया गया है।
क्या है असल नियम
अभी भी वही पुराने नियम लागू हैं. शहर में रहने वालों के लिए बुकिंग का दिन 25 तय है. इसके अलावा गांव में रहने वालों के लिए 45 दिन तय किए गए हैं. यह नियम सभी लोगों पर एक जैसा लागू होता है, इसमें कोई अलग कैटेगरी नहीं है। मंत्रालय ने साफ किया कि एलपीजी की सप्लाई व्यवस्था पर लगातार निगरानी रखी जा रही है और उपभोक्ताओं को घबराने की जरूरत नहीं है। सरकार ने यह भी कहा कि अफवाहों के चलते “पैनिक बुकिंग” बढ़ रही है, जिससे सिस्टम पर दबाव बन रहा है। इसलिए उपभोक्ताओं से जरूरत के अनुसार ही बुकिंग करने की अपील की गई है।
संकट की असली वजह क्या है?
पश्चिम एशिया में तनाव और Strait of Hormuz से सप्लाई बाधित होने के कारण भारत में एलपीजी की उपलब्धता प्रभावित हुई है। भारत अपनी लगभग 60% एलपीजी जरूरत आयात से पूरी करता है, जिसमें बड़ा हिस्सा इसी रूट से आता है। इसी कारण सरकार को बुकिंग नियमों में बदलाव, सप्लाई मॉनिटरिंग और वैकल्पिक ईंधन (PNG) को बढ़ावा देने जैसे कदम उठाने पड़े हैं।
दिल्ली में गैस किल्लत, घर-कारोबार प्रभावित
जहां केंद्र सप्लाई सामान्य होने का दावा कर रहा है, वहीं दिल्ली में हालात अलग तस्वीर दिखा रहे हैं। कई इलाकों में सिलेंडर की डिलीवरी में देरी। घरों में खाना बनाने तक की समस्या। छोटे होटल और ढाबे सबसे ज्यादा प्रभावित। गैस एजेंसियों पर लंबी कतारें और बढ़ती मांग ने स्थिति को और गंभीर बना दिया है।
पैनिक बुकिंग से बढ़ी समस्या
विशेषज्ञों के मुताबिक असली संकट सप्लाई से ज्यादा “डिमांड स्पाइक” का है। अचानक लाखों की संख्या में बुकिंग। ऑनलाइन सिस्टम पर दबाव, डिलीवरी में देरी। सरकार का कहना है कि जरूरत से ज्यादा बुकिंग और जमाखोरी से कृत्रिम संकट पैदा हो रहा है।
सरकार के कदम
स्थिति संभालने के लिए सरकार ने कई उपाय किए हैं:
रिफाइनरी से LPG उत्पादन बढ़ाना
घरेलू उपभोक्ताओं को प्राथमिकता
ब्लैक मार्केटिंग पर सख्ती
PNG (पाइप्ड गैस) को बढ़ावा




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