ईरान संकट: अमेरिका ने ईऱान के साथ युद्ध पर लगाया ब्रेक, अमेरिकी राष्ट्रपति ने दी पांच दिन की मोहलत
- Mar 23
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वॉशिंगटन/तेहरान: अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोशल मीडिया पर पोस्ट कर ईरान को पांच दिन का वक्त दिया है। अमेरिका ने ईरान के ऊर्जा ठिकानों पर प्रस्तावित सैन्य हमलों को 5 दिनों के लिए टाल दिया है। यह फैसला ऐसे समय आया है जब दोनों देशों के बीच हालात तनावपूर्ण हैं। यह पहली बार नहीं है जब अमेरिका ने युद्ध खत्म करने की बात कही हो लेकिन ईरान ने मुआवजे और दोबारा ऐसा ना करने की शर्त रखी थी। अब ट्रंप ने सोशल मीडिया पर लिखा है, यह कदम बातचीत के लिए “एक मौका” देने के उद्देश्य से उठाया गया है, हालांकि स्थिति अभी भी पूरी तरह नियंत्रण में नहीं है। ध्यान रहे कि यह युद्ध अमेरिका और ईरान के बीच सिर्फ नहीं है इसमें इजरायल की अहम भूमिका है।
ईरान पर हुए अमेरिकी और इजरायल के हमले के बाद ईरान ने होरमुज़ जलसन्धि को बंद कर दिया था। कई देशों के जहाज इस रास्ते पर फंसे थे। ट्रंप ने कई देशों से मदद मांगी थी कि इस रास्ते को खोलने के लिए हमें ईरान के खिलाफ साथ आना होगा लेकिन किसी देश ने ट्रंप की तरफ हाथ नहीं बढ़ाया। यह दुनिया के सबसे अहम तेल मार्गों में से एक है ईरान पर आरोप है कि उसने इस मार्ग को बाधित किया अमेरिका ने इसे वैश्विक सप्लाई के लिए खतरा बताया इसी को लेकर अमेरिका ने ईरान के पावर प्लांट्स पर हमले की चेतावनी दी थी।
अमेरिका और ईरान के बीच के रिश्ते
साल 1979 की इस्लामिक क्रांति का दौर था। ईरान में शाह की सत्ता खत्म हुई और अमेरिका समर्थित सरकार गिर गई। इसके बाद से ही दोनों देशों के रिश्ते खराब हो गए। ईरानी छात्रों ने तेहरान स्थित अमेरिकी दूतावास पर कब्जा कर लिया और 52 अमेरिकी नागरिकों को 444 दिनों तक बंधक बनाए रखा। परमाणु विवाद (2000 के बाद) अमेरिका ने ईरान पर परमाणु हथियार बनाने का आरोप लगाया, जबकि ईरान ने इसे शांतिपूर्ण कार्यक्रम बताया। कासिम सुलेमानी की हत्या (2020) अमेरिका ने ईरान के शीर्ष सैन्य कमांडर की ड्रोन हमले में हत्या कर दी, जिससे तनाव चरम पर पहुंच गया लगातार प्रतिबंध और प्रॉक्सी टकराव मध्य पूर्व में दोनों देश सीधे नहीं, बल्कि सहयोगी समूहों के जरिए एक-दूसरे को चुनौती देते रहे हैं।
5 दिन की राहत के मायने
ट्रंप का 5 दिन तक हमले टालने का फैसला अस्थायी राहत जरूर देता है, लेकिन दोनों देशों के बीच अविश्वास गहरा है। सैन्य तैयारी जारी है। क्षेत्रीय तनाव कम नहीं हुआ है। ईरान पहले ही चेतावनी दे चुका है कि अगर हमला हुआ, तो वह जवाबी कार्रवाई करेगा।
वैश्विक असर क्यों अहम है?
इस टकराव का असर सिर्फ दो देशों तक सीमित नहीं है। तेल की कीमतें प्रभावित होती हैं। वैश्विक बाजार अस्थिर होते हैं। मध्य पूर्व में युद्ध का खतरा बढ़ता है।




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