इंडिगो का फ्लाइट संकट क्या है, क्यों है, कब ठीक होगा और जिम्मेदार कौन ?
- Dec 6, 2025
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कैसे शुरू हुई समस्या
इस पूरे विवाद की शुरुआत जनवरी 2024 के आसपास हुई है। पायलट यूनियन ने दिल्ली हाईकोर्ट में याचिका दायर की। इस याचिका में बताया कि कैसे उन्हें ओवर ड्यूटी करनी पड़ रही है। बढ़ती थकान और लगातार लंबी ड्यूटी, जो सेफ्टी के लिहाज से जोखिमभरी थी।
हाईकोर्ट के निर्देशों के बाद DGCA ने फ्लाइट ड्यूटी टाइम लिमिटेशन (FDTL) के नए नियम बनाए और इन्हें दो चरणों में लागू किया
पहला चरण (1 जुलाई 2025 से लागू):
• पायलटों को साप्ताहिक आराम 36 घंटे से बढ़ाकर 48 घंटे देना अनिवार्य हुआ।
• छुट्टी को साप्ताहिक रेस्ट में जोड़ने पर रोक लगा दी गई।
दूसरा चरण (1 नवंबर 2025 से लागू):
• लगातार नाइट ड्यूटी पर पाबंदी लगाई गई।
• रात में अधिकतम ड्यूटी समय घटाया गया।
असल समस्या दूसरे चरण के बाद शुरू हो गई। इंडिगो पायलटों और क्रू की कमी को पूरा नहीं कर पा रहा। समस्या बढ़ती गई और दिसंबर में आकर यह एक बड़ी समस्या बन गई।
पिछले 4 दिनों में हालात अचानक खराब क्यों हुए?
पिछले 4 दिनों में हालात अचानक खराब क्यों हुए?
2–5 दिसंबर के बीच:
• 1700+ फ्लाइट्स रद्द, हजारों देरी से
• ऑन-टाइम परफॉर्मेंस 35% से गिरकर 8.5% तक
• दिल्ली–मुंबई टिकट कीमतें 10,000 से बढ़कर 40,000 रु. तक पहुँची
• एयरपोर्ट्स पर यात्रियों की भारी भीड़, कई घंटे लाइनें
• छोटे शहरों में भी कनेक्टिंग फ्लाइट्स ठप
5 दिसंबर तक स्थिति इतनी बिगड़ गई कि इंडिगो को एक ही दिन में 1000 से ज्यादा फ्लाइट्स रद्द करनी पड़ीं।
इंडिगो लगातार बहाने क्यों देता रहा? असली चूक क्या थी?
इंडिगो ने यात्रियों को अपने अंदर के हालात की जानकारी पहले नहीं दी। संभव है कि अगर कंपनी पहले से सही और पुख्ता जानकारी देती तो लोग यात्रा के लिए दूसरे विकल्पों पर विचार करते। इंडिगो ने पहले मौसम, तकनीकी दिक्कत, एयरपोर्ट कंजेशन और सर्दियों के शेड्यूल का बहाना बनायाा लेकिन बाद में DGCA मीटिंग में एयरलाइन ने माना
• नए नियमों के अनुसार सही प्लानिंग नहीं की गई
• क्रू की जरूरत अनुमान से अधिक थी
• पिछले 9 महीनों में नई भर्तियां उतनी नहीं की गईं
एयरलाइन को संकट का अंदाजा पहले से था, लेकिन कार्रवाई नहीं की गई।
इंडिगो ने क्यों बढ़ने दिया संकट, पहले रोकी जा सकती थी यह आपात स्थिति
कई एक्सपर्ट्स और यात्री मानते हैं कि इंडिगो को अंदाजा था कि यह संकट बड़ा होगा। इंडिगो ने जानबूझकर संकट बनने दिया ताकि सरकार FDTL में ढील देने को मजबूर हो जाए। “यह एक तरह की सोची-समझी रणनीति के तहत हुआ जिस पर सवाल खड़े हों और नियमों में ढील दी जाए।
नए FDTL नियम क्या हैं और जरूरी क्यों थे?
• दिन में अधिकतम 10 घंटे ड्यूटी
• रात में अधिकतम 8 घंटे
• हफ्ते में उड़ान सीमा: 100–125 घंटे
• पायलट को हर सप्ताह 48 घंटे का रेस्ट
• लगातार सिर्फ दो नाइट ड्यूटी
• एयरलाइन को हर महीने थकान-जोखिम रिपोर्ट देनी होगी
क्यों जरूरी थे?
पायलट थकान दुनिया भर में एयर सेफ्टी के लिए सबसे बड़ा जोखिम माना जाता है।
भारत में पायलटों की लंबी ड्यूटी और कम आराम के कई मामले सामने आए थे।
DGCA ने पायलट्स की थकान पर आधारित रिपोर्ट्स की समीक्षा कर ये नियम लागू किए।
अगले 5 साल में भारत में 3700 से ज्यादा नए पायलटों की कमी रहने वाली है—इससे दबाव और बढ़ेगा।
. इंडिगो ही सबसे ज्यादा क्यों प्रभावित हुआ?
• मार्केट में 60% हिस्सेदारी, सबसे ज्यादा फ्लाइट्स
• दिनभर में 2300 उड़ानें, जिनमें रात–सुबह के स्लॉट सबसे ज्यादा
• बाकी एयरलाइंस के विमान कम उड़ रहे, इसलिए उनका स्टाफ ज्यादा उपलब्ध
• इंडिगो की पायलट संख्या—5456, क्रू—10,212, पर फ्लाइट्स ज्यादा
जितनी बड़ी एयरलाइन, उतनी ज्यादा चुनौती।
सरकार क्या कर सकती थी और उसने क्या किया?
1. नए नियम वापस लेना – सेफ्टी कारणों से असंभव
2. अन्य एयरलाइंस से क्षमता ट्रांसफर – सीमित समाधान
3. पायलट ड्यूटी में छूट – रिस्की
4. इंडिगो पर भारी पेनल्टी – हालात और खराब होने का खतरा
अंत में DGCA ने अस्थायी राहत दी और कहा कि FDTL नियमों में ढील 10 फरवरी 2026 तक दी जा रही है।
हालात कब सुधरेंगे?
इंडिगो CEO पीटर एल्बर्स के अनुसार—
• “पूरा सिस्टम रिबूट हो रहा है।”
• “10–15 दिसंबर के बीच स्थिति सामान्य होने की उम्मीद।”
• “फ्लाइट रद्द होने में धीरे-धीरे कमी आएगी।”
एक्सपर्ट्स का अनुमान है कि—
• इंडिगो जल्द नया शेड्यूल जारी कर सकती है
• कुछ रूट्स पर उड़ानें कम करनी पड़ेंगी
• पायलटों की भर्ती बढ़ानी पड़ेगी
• स्थिति पूरी तरह सामान्य होने में 2–3 सप्ताह लग सकते हैं




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