विश्व मृद्दा दिवस पर विशेष : बिगड़ रही है मिट्टी की सेहत
- Dec 5, 2025
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दिव्ययान कृषि विज्ञान केंद्र, राँची में “स्वस्थ मिट्टी, स्वस्थ शहर” विषय पर मृदा दिवस २०२५ का आयोजन किया गया। डॉ. अजीत कुमार सिंह, वरीय वैज्ञानिक सह प्रधान, केवीके राँची ने इस वर्ष की थीम के अनुसार मृदा के महत्व पर विस्तृत रूप से प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि मृदा की तीन अवस्थाएँ – भौतिक, रासायनिक एवं जैविक – बहुत तेजी से क्षरण का सामना कर रही हैं। मृदा सजीव है और हमें इसे उसी भाव से देखना चाहिए।
क्यों बिगड़ रही है मिट्टी की सेहत
जलवायु परिवर्तन और मानव गतिविधियों के कारण मिट्टी लगातार क्षतिग्रस्त हो रही है। अपरदन प्राकृतिक संतुलन को बिगाड़ देता है, जिससे जल का अवशोषण और उपलब्धता कम हो जाती है तथा भोजन में पोषक तत्वों का स्तर घटता है। सामान्यतः हम मिट्टी को गाँव और प्रकृति से जोड़कर देखते हैं, लेकिन शहरी मिट्टी भी उतनी ही महत्वपूर्ण है।

शहर में मिट्टी की हालत क्या है
विश्व मृदा दिवस २०२५ का विषय “स्वस्थ मिट्टी, स्वस्थ शहर” शहरी परिदृश्य पर केंद्रित है। इमारतों और सड़कों के नीचे भी मिट्टी होती है, जो यदि पारगम्य और वनस्पति से ढकी हो, तो वर्षा जल को अवशोषित करने, तापमान नियंत्रित करने, कार्बन संचित करने और वायु गुणवत्ता सुधारने में सहायक होती है किंतु जब इसे सीमेंट से ढक दिया जाता है, तो यह भूमिकाएँ समाप्त हो जाती हैं, जिससे शहर बाढ़, अत्यधिक गर्मी और प्रदूषण के प्रति अधिक संवेदनशील हो जाते हैं।
125 किसानों ने लिया कार्यक्रम में भाग
इस अवसर पर नीति निर्माताओं से लेकर नागरिकों तक सभी को आमंत्रित किया गया कि वे शहरी स्थानों को जड़ों से पुनर्विचार करें, ताकि अधिक हरित, लचीले और स्वस्थ शहर बनाए जा सकें। कार्यक्रम में झारखण्ड एवं बिहार के लगभग १२५ किसानों ने भाग लिया। इस अवसर पर डॉ. मनोज कुमार सिंह, डॉ. राजेश कुमार, डॉ. भरत महतो, डॉ. रविन्द्र सिंह, डॉ. नेहा राजन एवं डॉ. विशाखा सिंह ने भी अपने विचार प्रस्तुत किए।




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