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झारखंड में तसर रेशम का क्षेत्र कैसे हो विकसित, तकनीक और बाजार पर हुई चर्चा

Jun 23
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केंद्रीय रेशम बोर्ड के बेसिक तसर सिल्कवर्म सीड संगठन (सीएसबी-बीटीएसएसओ), बिलासपुर की निदेशक डॉ. जी. पुणितावती ने केंद्रीय तसर अनुसंधान एवं प्रशिक्षण संस्थान (सीटीआरटीआई), रांची के 62वें स्थापना दिवस समारोह में सहभागिता की। इस अवसर पर उन्होंने संस्थान के वैज्ञानिकों के साथ तसर रेशम क्षेत्र के विकास से जुड़े विभिन्न विषयों पर विस्तृत वैज्ञानिक चर्चा की। स्थापना दिवस समारोह के दौरान डॉ. पुणितावती एवं उनकी टीम ने सीटीआरटीआई, रांची के वैज्ञानिकों के साथ तकनीकी विचार-विमर्श किया। चर्चा का मुख्य केंद्र तसर रेशम उत्पादन को अधिक टिकाऊ, लाभकारी एवं वैज्ञानिक बनाने हेतु नवीन तकनीकों के उपयोग पर रहा। वैज्ञानिकों ने विशेष रूप से तसर पोषक पौधों के उच्च सघनता (हाई-डेंसिटी) रोपण, अंतरवर्तीय खेती (इंटरक्रॉपिंग) तथा रोग प्रबंधन रणनीतियों पर अपने अनुभव एवं शोध निष्कर्ष साझा किए।



बैठक में बताया गया कि उच्च सघनता रोपण पद्धति अपनाने से सीमित भूमि क्षेत्र में अधिक संख्या में तसर पोषक पौधे विकसित किए जा सकते हैं, जिससे पत्ती उत्पादन में वृद्धि होती है और किसानों को बेहतर आर्थिक लाभ प्राप्त होता है। साथ ही, अंतरवर्तीय खेती की तकनीक किसानों की आय के अतिरिक्त स्रोत विकसित करने में सहायक सिद्ध हो सकती है।रोग प्रबंधन के क्षेत्र में वैज्ञानिकों ने तसर कीटों को प्रभावित करने वाले प्रमुख रोगों की रोकथाम एवं नियंत्रण हेतु उन्नत वैज्ञानिक उपायों पर चर्चा की। विशेषज्ञों ने इस बात पर बल दिया कि रोगमुक्त बीज, स्वच्छ पालन पद्धतियाँ तथा समयबद्ध निगरानी तसर उत्पादन की गुणवत्ता एवं उत्पादकता बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।



इस अवसर पर डॉ. जय प्रकाश पाण्डेय सहित उपस्थित वैज्ञानिकों ने विभिन्न अनुसंधान गतिविधियों का अवलोकन किया तथा तसर क्षेत्र के समग्र विकास के लिए विभिन्न संस्थानों के बीच सहयोग को और सुदृढ़ बनाने पर विचार-विमर्श किया। डॉ. जी. पुणितावती ने कहा कि सीटीआरटीआई, रांची द्वारा विकसित नवीन तकनीकों एवं अनुसंधान उपलब्धियों का लाभ तसर कृषकों तक पहुँचाना समय की आवश्यकता है। इससे तसर आधारित आजीविका को सशक्त बनाने तथा ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार सृजन को बढ़ावा मिलेगा।यह कार्यक्रम वैज्ञानिकों के बीच ज्ञान एवं अनुभवों के आदान-प्रदान का एक महत्वपूर्ण मंच सिद्ध हुआ तथा देश में सतत एवं वैज्ञानिक तसर रेशम विकास की दिशा में नए अवसरों को बल प्रदान किया।


 
 
 

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